
अजय त्रिपाठी /उत्तर प्रदेश के एटा जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां एक आठ साल का मासूम बच्चा अपनी मां नीलम के शव को लेकर अकेले ही पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गया। इस घटना ने समाज और रिश्तों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि नीलम लंबे समय से बीमार थीं और उनका इलाज चल रहा था।मासूम बेटे ने मां की बीमारी के दौरान दिन-रात उनकी देखभाल की। वह खुद खाना बनाता, पानी पिलाता और जरूरत का हर काम करता रहा। दुखद बात यह रही कि इस कठिन समय में परिवार के अन्य सदस्यों ने मां-बेटे की कोई मदद नहीं की। मां की हालत बिगड़ने पर भी कोई साथ नहीं आया।बीमारी के चलते नीलम की मौत हो गई। इसके बाद भी आठ साल के बच्चे ने हिम्मत नहीं हारी और समाज की बेरुखी के बीच अकेले ही मां के शव को पोस्टमार्टम के लिए लेकर पहुंचा। पोस्टमार्टम हाउस में जब अधिकारियों और लोगों ने यह दृश्य देखा तो सभी की आंखें नम हो गईं।मासूम की कहानी सुनकर वहां मौजूद लोगों ने उसकी मदद की और प्रशासन को भी मामले की जानकारी दी गई। यह घटना न सिर्फ प्रशासन बल्कि समाज के लिए भी सोचने का विषय है कि जहां एक बच्चा अपनी मां का सहारा बना, वहीं अपने ही रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ लिया।
